अवसाद या डिप्रेशन (Definition of Depression ) की परिभाषा :
मनोविज्ञान की माने तो अवसाद, एक मनोदशा या भावनात्मक स्थिति है जो ग्लानि की भावना या अपराध की भावना और जीवन का आनंद लेने की कम क्षमता से चिह्नित होती है। अगर हम ये कहें की अवसाद एक आम और गंभीर चिकित्सा बीमारी है जो नकारात्मक रूप से आपकी भावनाओं, आपके सोचने के तरीके और आपके कार्य शैली को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है तो ग़लत नहीं होगा। उदासी या आमतौर पर आनंद लेने वाली गतिविधियों में रुचि की हानि के कारण उदासीनता की भावना पैदा होती हैऔर यह विभिन्न प्रकार की भावनात्मक और शारीरिक समस्याएं पैदा कर सकता है | आपके व्यवसयिक कार्य और घरेलू कार्य करने की क्षमता को कम कर सकता है।
सौभाग्य से, यह इलाज योग्य भी है।
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| दुखी और अकेली अवसाद से ग्रस्त व्यक्ति |
अवसाद से ग्रसित व्यक्ति आमतौर पर निम्नलिखित लक्षणों में से कुछ भी या फिर सभी का अनुभव कर सकता है:
- उदासी; निराशा या निराशावाद की भावनाएं
- कम आत्मसम्मान और ऊंचा आत्म-मूल्यह्रास;
- सामान्य गतिविधियों में रुचि न लेना या कम रुचि लेना
- ऊर्जा की कमी या थकान में वृद्धि
- बेकार या दोषी महसूस करना
- सुस्ती
- भूख में कमी या सामान्य से अधिक भोजन करना
- अनिद्रा या फिर बहुत अधिक नींद आना
- मौत या आत्महत्या के विचार
- निर्णय लेने में या सोचने में कठिनाई का सामना करना
अवसाद के ये लक्षण हल्के से गंभीर तक भिन्न हो सकते हैं | अवसाद समान्य उदासी या दुःख / शोक से भिन्न है और यदि ये लक्षण दो सप्ताह तक रहते हैं तो आपको निश्चित ही चिकित्स्क के सम्पर्क करना चाहिए |
शोक प्रत्येक व्यक्ति के लिए प्राकृतिक और अवसाद के कुछ समान लक्षण साझा करती है। लेकिन उदास होना अवसाद (डिप्रेशन) नहीं है | क्यूंकि दु: ख या शोक में, आत्म-सम्मान आमतौर पर वैसा ही सकारात्मक बना रहता है जबकि अवसाद (Major Depression ) में आत्मग्लानि और आत्म-घृणा की भावना आम है।
अवसाद के मुख्य कारक:
अवसाद के कई कारण हो सकते हैं प्रमुख निम्नलिखित हैं :
१. जो लोग आसानी से तनाव से ग्रस्त हो जाते हैं, जिनका आत्म-सम्मान कमज़ोर होता है, या जो आमतौर पर निराशावादी होते हैं, वे अवसाद शिकार आसानी से हो सकते हैं।
२. अगर आपके परिवार में कोई अवसाद से ग्रस्त था तो सम्भव है आपके भी अवसाद से ग्रस्त होने संभावना बढ़ जाती है।
३. हिंसा, उपेक्षा, दुर्व्यवहार या गरीबी के लगातार संपर्क से भी लोग अवसाद की चपेट में आ सकते हैं।
४. मस्तिष्क के कुछ रसायनों के फेर-बदल भी अवसाद के लक्षणों में योगदान कर सकते है।
एक स्टडी के अनुसार महिलाओं में अवसाद के लक्षण और इससे ग्रस्त होने की सम्भावना भी अधिक है |
अवसाद (डिप्रेशन) में योग की भूमिका :
अभी तक हमे जाना की अवसाद का अर्थ क्या है, अवसाद (डिप्रेशन)के शुरुआती लक्षण क्या है? आइये अब बात करते हैं की किस प्रकार योग से अवसाद का इलाज किया जा सकता है | क्या अवसाद के नियंत्रण में अवसाद की भूमिका हो सकती है या नहीं ? डिप्रेशन दूर करने के लिए योग में कौन-कौन से योगासन और
प्राणायाम करने चाहिए;
योग का अभ्यास सभी प्रकार के रोग में लाभदायक होता है | चाहे आपकी बीमारी शारीरक हो या फिर मानसिक , योगाभ्यास से दोनों तरह की बिमारियों से निजात पाया जा सकता है |
अवसाद के लिए योग;
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| फ्री योग सत्र |
अवसाद के मुक्ति के लिए आप निचे बताये हुए योगासनों का अभ्यास शुरू करें :
१. शुक्ष्म व्यायाम :
कुछ लोगों को शुक्ष्म व्यायाम अजीब लगेगा लेकिन ये शरीर को सुचारु रूप से चलाने में और आसनो को बेहतर करने में काफी सहायक होते हैं |
२. मत्स्यासन :
मत्स्यासन के अभ्यास से मष्तिष्क और मेरुदंड दोनों बेहतर तरीके से काम करना शुरू करते हैं |
२. सूर्य नमस्कार :
सूर्य नमस्कार के सभी १२ आसनो का अभ्यास अवसाद से ग्रस्त रोगी को तेज़ी से आरोग्य की ओर ले जाता है |
३. शवासन :
योगासन में शवासन सबसे अंत में किया जाने वाला आसन है लेकिन इसके लाभ अद्वितीय है | ये न सिर्फ आपके शरीर को विश्राम देता है बल्कि कोशिकाओं तक को पूरी तरह से शिथिल होने में मदद करता है |
१० मिनट के लिए शवासन अवश्य करें |
अवसाद में प्राणायाम का महत्व :
प्राणायाम का अभ्यास अवसाद लक्षणों को कम करने में बहुत सहायक है | कपालभाति, अनुलम-विलोम और भ्रामरी करने से कम समय में बहुत अच्छे परिणाम हैं |
योग के निरंतर अभ्यास से ही आपको अवसाद जैसी गंभीर समस्या से छुटकारा मिल सकता है | योग शुरू करने से पहले एक
योग केंद्र पर सम्पर्क करें या फिर एक
योग प्रशिक्षक से सम्पर्क करें |
नोट: एक बार अपने चिकित्स्क से अवश्य सलाह लें ताकि आपको योग करने में किसी तरह की समस्या न हो |
जय हिन्द !
धैर्य योग
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